Real Bajrangbali Ki Aarti 18 Hanuman Ji Ke Naam Hanuman Jayanti 2023

हनुमान जन्मोत्सव जिसे Hanuman Jayanti कहा जाता है यह एक हिन्दू पर्व है जिसे हर हिन्दू पुरे दिल से मनाता है। यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था और वे चिरंजीवी है मतलब अमर है जो की त्रेता युग से अभी तक जीवित है और श्री राम जी का नाम जाप कर रहे हैं। Hanuman ji को कलयुग में सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली भगवन में से एक माना जाता है। आज हम Bajrangbali ki Aarti को हिंदी के साथ इंग्लिश में भी बातएंगे ताकि आपको पड़ने में आसानी हो।

Hanuman Jayanti

Hanuman Jayanti 2023 

6 April 2023 Thursday

Hanuman Jayanti 2024 

2024 में हनुमान जयंती 23 अप्रैल 2024 दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। 

23 अप्रैल दिन मंगलवार को पूर्णिमा तिथि सुबह 3 बजकर 27 आरंभ होगी। 24 अप्रैल को 12 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगी। जो भक्तगण इस दिन व्रत रहते हैं, वह 24 अप्रैल को ही व्रत रहे, क्योंकि उसी दिन उदया तिथि मानी जाती है।

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ।।

Hanuman Ji प्रभु श्री राम के परम भक्त हैं । चारों युगों में जो जीवित रूप से विराजमान है वह Hanuman Ji। माता सीता ने उन्हें अमरता का वरदान दिया है रामचरितमानस की चौपाई में इसका वर्णन है माता सीता ने Bajrangbali से कहा –

अजर अमर गुणानिधि सुत होहू ।
करहू कृपा रघुनायक छोहू।।
करही कृपा प्रभु अस सुनि काना ।
निर्भर प्रेम मगन हनुमाना ।।

अगर प्रभु श्री राम की कृपा प्राप्त करनी है तो उस का सबसे सरल उपाय है की Hanuman Ji को प्रसन्न किया जाए और हनुमान जी केवल राम राम कहने से ही प्रसन्न हो जाते हैं।

Hanuman Ji Ka Janm Kahan Hua Tha

वैसे तो hanuman ji ka janm kahan hua tha उसपे चर्चा चली आ रही है इसलिए इस विषय पे हम ज्यादा कुछ तो नहीं बता सकते लेकिन सूत्रों की मने तो। हिंदू पौराणिक कथाओं में Bhagwan Hanuman के जन्म स्थान से जुड़ी कई कहानियां हैं। कुछ में हनुमान का जन्म झारखंड के गुमला जिले के अंजन गांव की एक गुफा में हुआ बताया जाता है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने उनके जन्मस्थान का नासिक के पास महाराष्ट्र की अंजनेरी पहाड़ियों के रूप में दावा किया है।

आज हम आपको Hanuman Ji के जन्म से जुड़ी कथा के बारे में बताते हैं हनुमान जी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। वानरराज केसरी और माता अंजना के पुत्र हैं हनुमान जी, परंतु उन्हें पवन पुत्र भी कहते हैं इसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे।

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने बताया है की हनुमान जी का जन्म ऋषियों के आशीर्वाद के फलस्वरुप हुआ है । एक बार वानरराज केसरी प्रभास तीर्थ में पहुंचे वहां कुछ महर्षि समुद्र के किनारे पूजा कर रहे थे । तभी एक विशालकाय हाथी आकर ऋषियों की पूजा में खलल डालने लगा, उत्पात मचाने लगा ।

वानरराज केसरी ने यह देखा और उन्होंने हाथी के दांत तोड़ दिए और उसका वध कर दिया। सभी ऋषि वानरराज केसरी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि उन्हें महापराक्रमी, इच्छा अनुसार रूप धारण करने वाला, पवन के समान वेग वाला और रुद्र के तेज वाला पुत्र प्राप्त होगा।

 

Hanuman ji
Hanuman Ji

 

कुछ समय पश्चात 1 दिन माता अंजना मानव रूप लेकर पर्वत पर भ्रमण कर रही थी और डूबते हुए सूर्य देव को निहार रही थी। तभी अचानक बहुत तेज हवा चलने लगी और माता अंजना के कपड़े उड़ने लगे माता आसपास देखा तो वहां हवा से एक भी पत्ते नहीं हिल रहे थे तब माता समझ गई कि यह कोई माया है उन्होंने क्रोधित होकर कहा की कौन है वह मूर्ख जो एक पति परायण स्त्री का अपमान कर रहा है।

तभी पवन देव प्रकट हुए और माता अंजना से क्षमा मांग कर कहा कि ऋषियों ने वानरराज केसरी को वरदान दिया है उन्हें मेरे समान पुत्र प्राप्त होगा इसीलिए मुझे आपके शरीर को स्पर्श करना पड़ा, मेरे वेग से भगवान रुद्र (शिव )का एक अंश भी आपके शरीर में प्रवेश कर चुका है इसलिए आपके पुत्र भगवान शंकर के 11 वे रूद्र अवतार होंगे वह परम शक्तिशाली होंगे।

एक अन्य कथा के अनुसार अयोध्या के महाराज दशरथ ने जब पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाया तब यज्ञ के समाप्त होने पर अग्नि देव प्रकट हुए और तीनों रानियों को प्रसाद के रूप में खीर दी तभी वहां एक चील उड़ कर आया और रानी सुमित्रा के हाथ से खीर का पात्र लेकर उड़ गया और जहां माता अंजना भगवान शिव की पूजा कर रही थी वहां जाकर रख दिया। माता अंजनी ने उसे भगवान शिव का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लिया । उसी प्रसाद के फल स्वरूप हनुमान जी का जन्म हुआ।

हनुमान जी बचपन से तेजस्वी और बलशाली थे एक बार जब हनुमान जी को भूख लगी थी तब वे सूर्य देव को फल समझकर निगल गए। सारा संसार अंधकारमय हो गया देवताओं के बहुत समझाने पर वे नहीं माने तब इंद्रदेव ने उन पर अपने वज्र का प्रहार किया जिससे हनुमान जी का मुंह खुल गया और सूर्यदेव बाहर निकल गए।

परंतु वज्र के प्रहार से हनुमान जी की ठोड़ी टूट गई और वे मूर्छित होकर धरती पर गिर गए । अपने पुत्र की ऐसी स्थिति देखकर पवन देव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना संचार रोक दिया। पवन का संचार रुकते ही सारी सृष्टि में हाहाकार मच गया। ब्रह्मा जी ने पवन देव को समझाया तब पवन देव ने अपना संचार प्रारंभ किया ।

ब्रह्मा जी ने हनुमान जी को वरदान दिया कि उन्हें कोई भी ब्रह्मास्त्र नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। वरुण देव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उसे जल से कभी भय नहीं होगा । इंद्रदेव ने आशीर्वाद देते हुए कहा की वज्र के प्रहार से इसकी थोड़ी टूट गई है इसलिए आज से इसका नाम हनुमान होगा यह वज्र के समान कठोर और बलशाली होगा ।

हनुमान जी अपने चंचल स्वभाव के कारण पर्वत पर रहने वाले, तपस्या करने वाले ऋषि-मुनियों को परेशान किया करते थे । जिससे उनके पूजा और तपस्या में विघ्न पढ़ता था। एक बार एक ऋषि ने क्रोध में आकर हनुमान जी को श्राप दे दिया की जिस शक्ति के बल पर वे सबको इतना परेशान करते हैं वह सारी शक्तियां हनुमान जी भूल जाएंगे और जब इनकी शक्तियों की अत्यंत आवश्यकता होगी तब किसी के याद दिलाने पर उन्हें अपनी कीर्ति और अपना बल याद आएगा ।

रामचरितमानस में कथा आती है सीता माता की खोज के समय जामवंत जी ने हनुमान जी को उनका बल याद करवाया था।

Hanuman Ji Ke Naam

वैसे तो Hanuman Ji Ke Naam अनेक है। हम कई नामों से उनकी पूजा करते हैं, उनका ध्यान करते हैं । कुछ विशेष नाम है जो मुख्य रूप से प्रचलित है।

 

Hanuman Ji Ke Naam
Hanuman Ji Ke Naam
  1. मारुति – मारुति हनुमान जी के बचपन का पहला नाम है जो उनके माता-पिता ने उन्हें दिया था।
  2. पवनपुत्र / वायुपुत्र – पवन देव के पुत्र के होने के कारण उन्हें पवन पुत्र कहते हैं ।
  3. केसरीनंदन – वानर राज केसरी के पुत्र होने के कारण केसरीनंदन कहलाते हैं ।
  4. आञ्जनेय / अंजनीसुत – माता अंजना के पुत्र हैं इसलिए आञ्जनेय कहलाते हैं ।
  5. महावीर – वीरों से भी अत्यधिक वीर है, परम बलशाली है इसीलिए महावीर कहलाते हैं ।
  6. हनुमान – इंद्र के बज्र के प्रहार से ठोड़ी टूट जाने के कारण हनुमान नाम पड़ा ।
  7. बजरंगबली – इंद्रदेव के आशीर्वाद से उनका शरीर वज्र के समान कठोर हो गया था इसीलिए उन्हें वज्रांगबली कहा गया। यही बजरंगबली बोलचाल की भाषा में बजरंगबली बन गया।
  8. कपिश्रेष्ठ – वानर जाति में जन्मे परंतु परम चतुर, महा ज्ञानी,राजनीति में निपुण और युद्ध कला में भी कौशल है इस कारण उन्हें कपियो (वानरों) में सबसे श्रेष्ठ माना गया है ।
  9. रामदूत – श्री राम जी के अनन्य भक्त और उनके सेवक है ।
  10. रामेष्ट – श्री राम भगवान के भक्त
  11. उधिकर्मण – उद्धार करने वाले
  12. फाल्गुनसखा – फाल्गुन अर्थात् अर्जुन के सखा
  13. सीतासोकविनाशक – देवी सीता के शोक का विनाश करने वाले
  14. पिंगाक्ष – भूरी आँखों वाले
  15. लक्ष्मण प्राणदाता – लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले
  16. अमित विक्रम – अत्यन्त वीरपुरुष
  17. दशग्रीव दर्प: – रावण के गर्व को दूर करने वाले
  18. वानरकुलथिन थोंडैमान – वानर वंश (तमिल) के वंशज

तो ये थे कुछ Hanuman Ji Ke Naam जिसे हम पुकार के Bajrangbali की पूजा करते है

Hanuman Stuti / श्री हनुमान स्तुति –

मनोज एवं मारुत तुल्य वेगम् ।
जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।।
वातात्मजम् वानरयुथ मुख्यम् ।
श्री राम दूतम शरणम प्रपध्ये।।

 

Bajrangbali Ki Aarti
Bajrangbali Ki Aarti

 

श्री हनुमान जी की आरती / Bajrangbali Ki Aarti / Hanuman Aarti / Hanuman Ji Ki Aarti

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

Shri Hanuman Ji Ki Aarti in English Lyrics / Bajrangbali Ki Aarti

 

Bajrangbali Ki Aarti
Bajrangbali Ki Aarti

 

Aarti ki jai Hanuman lala ki. dusht dalan raghunaath kala ki..
jaake bal se girivar kaampe. rog dosh jaake nikat na jhaanke..

Anjani putr mahaabaladaayee. santan ke prabhu sada sahaee.
de beera Raghunaath pathae. Lanka jaari siya sudh laye.
Lanka so kot samundar see khai. jaat pavanasut baar na lai.
lanka jaari asur sanghaare. siyaaram j- ke kaaj sanvaare.

Lakshman moorchhit pade sakaare. aani sanjeevan praan ubaare.
paithee pataal tori jamakaare. Ahiraavan ki bhuja ukhaade.

bain bhuja asur dal maare. daahine bhuja santajan taare.
sur-nar-muni jan aarti utaare. jai jai jai Hanuman uchaare.
kanchan thaar kapoor lo chhai. Aarti karat anjana maai.
lankavidhvans kinh raghuraee. tulasi daas prabhu kirati gai.

Jo Hanuman ji ki Aarti gaavai. basee baikunth paramapad paavai.
Aarti kijai Hanuman lala ki. dusht dalan raghunaath kala ki.

Jai Hanuman

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